November 19, 2018

किसी भी त्यौहार के साथ छेड़छाड़ गलत, दीपावली में पटाखों पर प्रतिबंद्ध पर हिंदुओं के साथ-साथ मुझे भी दुख: आज़ाद अली

देहरादून। दीपावली का त्यौहार आने वाला है। देशभर के बाजारों में दिवाली को लेकर रौनक देखते ही बनती है किन्तु हर बार की तरह दीवाली इस बार शायद उतनी बेहतरीन नहीं होगी जितनी हमेशा होती रही है, वजह है पटाखों पर लगा प्रतिबंध। ये कहना है उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश सचिव आज़ाद अली का।

उन्होंने कहा कि इस बार दिवाली का रंग फीका रहने वाला है। हर बार की तरह इस बार दिवाली पर पटाखों की गूंज सुनाई नहीं देगी। देश की सबसे बड़ी अदालत ने पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। जिससे इस बार दिवाली का मजा किरकिरा होने जा रहा है।

आज़ाद अली ने कहा कि वे न्यायपालिका के निर्णय का सम्मान करते हैं। कोर्ट के सभी निर्णय तथ्यों के आधार पर ही होते हैं किन्तु आमजन की धार्मिक भावनाओं और परम्पराओं का भी यदि ध्यान इस निर्णय के तहत किया जाता तो बेहतर होता।

आज़ाद अली ने अपनी निजी राय व्यक्त करते हुए कहा कि  हिंदुस्तानी सदियों से पटाखों के साथ दिवाली मनाते आये हैं। खासतौर पर बच्चों में पटाखों को लेकर कुछ ज्यादा ही उत्साह रहता है। दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है। पटाखों पर बैन लगने से कहीं न कहीं हिंदुओं की धार्मिक भावनायें आहत हुई हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा जबरन थोपी गयी नोटबंदी और जीएसटी की मार से बाज़ार पहले से ही जूझ रहा है और ऐसे में पटाखों पर पाबंदी की वजह से व्यापारियों की कमर पूरी तरह से टूट चुकी है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार लग ही नहीं रहा है कि ये दिवाली का त्यौहार है।

आज़ाद अली ने कहा कि बाजार में भीड़भाड़ के बावजूद दिवाली की रौनक फीकी है। बाज़ार की मंदी और पटाखों के बैन को लेकर व्यापारियों में खासी नाराज़गी देखी जा रही है। इस मंदी का सीधा असर दिवाली के त्यौहार पर पड़ने जा रहा है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि पटाखों को लेकर सिर्फ हिंदुओं के दिवाली के पर्व को ही क्यों निशाना बनाया गया जबकि क्रिसमस, ईस्टर और नववर्ष पर भी देशभर में जमकर आतिशबाजी की जाती है। यही नहीं क्रिकेट या अन्य मैच जीतने पर व शादी-बारात में भी देशभर में खूब आतिशबाजी होती है किन्तु पटाखों को लेकर सिर्फ दिवाली को ही निशाना बनाना कहाँ तक जायज़ है।

आतिशबाजी जश्न का प्रतीक है। आज़ाद अली ने अपनी राय प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि बड़े और धमाकेदार पटाखों को ही बैन किया जाता तो कुछ हदतक बेहतर होता किन्तु पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगने से हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। दिवाली के त्यौहार पर बाजारों में पटाखों की गैर मौजूदगी की वजह से लोगों के चेहरों पर मायूसी आसानी से देखी जा सकती है।

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *