November 13, 2018

मुख्य विकास अधिकारी उत्तरकाशी पर कठोर चेतावनी दर्ज किए जाने का आदेश

देहरादून । आरटीआई कार्यकर्ता  दुवारा जब राज्याधीन सेवा में मूल/स्थाई  निवास के अनिवार्यता  सम्बन्ध में मुख्य विकास अधिकारी उत्तरकाशी से जानकारी मांगी  तो तो सम्बंधित के पास ऐसा कोई जियो नहीं था ,आर टी आई कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र अग्रवाल ने बताया की उनके द्वारा एक पत्र  सूचना का अधिकार के माध्यम से मुख्य विकास अधिकारी उत्तरकाशी के कार्यालय में लगाया गया जिसमे  जानकारी मागि गई थी की उत्तरकाशी के समेकित बाल संरक्षण  योजना के अंतर्गत जनपद स्तर पर संचालित समितियों /संस्थाओ के लिए तीन वर्षो के लिए नियत मानदेय पर निम्न पदों हेतु जिला प्रोबेशन अधिकारी उत्तरकाशी के कार्यालय के माध्यम से समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रकाशित की गई थी जबकि शाशन आदेशों में कहि भी ऐसा उल्लेख नहीं है जिसमे कहा  गया हो की इन नियुक्ति के लिए राज्याधीन सेवा में मूल /स्थायी की अनिवार्यता है,परन्तु सबंधित सूचना अधिकारी ने जब सही जवाब नहीं दिया तो आर टी आई कार्यकर्ता प्रथम अपील में गए परन्तु प्रथम अपील में भी कोई खास  सुनवाई नहीं हुई,श्रीअग्रवाल ने बताया की जब वह दितीय अपील में गए तब सूचना आयोग ने सुनवाई करते हुवे डीएम् उत्तरकशी से  लिखित में जवाब तलाब किया और सम्बंधित अधिकारी के विरुद्ध  सेवा पुस्तिका में भी टिप्पणी  करने के आदेश दिए ।  उत्तराखंड के 17 वर्षों के सफर में प्रवासी उत्तर भारतीयों को उनके संविधान प्रदत्त अधिकारों से वंचित रखने के सैकड़ों मामले सुने होगे परंतु राज्याधीन सेवा में मूल /स्थायी की अनिवार्यता के साथ आवेदन मांगे जाने पर संबंधित पर कार्रवाई का पहला मामला हुआ है।

मुख्य विकास अधिकारी उत्तरकाशी विनीत कुमार ने पत्रांक 2575 दिनांक 28/12/17 के द्वारा जिला प्रोबेशन अधिकारी जीत सिह रावत की सेवा पुस्तिका में बगैर उच्चाधिकारियों से अनुमोदन कराए चयन में मूल /स्थाई निवासी की शर्त लगाने पर कठोर चेतावनी दर्ज किए जाने का आदेश दिया है। इस आदेश की एक प्रति सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुरेन्द्र अग्रवाल को भी भेजी गई है।बन्धुओ यह हमारी नैतिक विजय है इससे राज्याधीन सेवा में भेदभाव करने वालों की प्रवृत्ति पर भी असर होगा

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