November 13, 2018

ट्रांसफार्मर घोटाले के बाद अब श्रीनगर-काशीपुर 400केवी लाइन की होगी जांच

देहरादून। ट्रांसफार्मर घोटाले में आरोपियों को चार्जशीट जारी करने के बाद से श्रीनगर-काशीपुर 400केवी लाइन निर्माण मामले से जुड़े अफसरों में हड़कंप मचा है। क्योंकि, इसकी जांच पूरी करने और दोषियों को चिह्नित करने के लिए सचिव ऊर्जा राधिका झा ने 30 जनवरी तक का समय दिया है।

 

  दरअसल, दस साल पहले इस लाइन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन, ‘खेल’ के चलते आज तक निर्माण शुरू ही नहीं हुआ। वित्तीय हानि तो हुई ही, साथ ही परियोजना का खर्च भी 300 करोड़ से ज्यादा बढ़ गया। नवंबर में सचिव ऊर्जा के निर्देश पर अपर सचिव ऊर्जा एवं पिटकुल प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने जांच निदेशक परिचालन संजय मित्तल और निदेशक वित्त अमिताभ मैत्रा को सौंपी थी। सूत्रों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट में कई ऐसे नाम भी शामिल हो सकते हैं, जो सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।

 

   पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड (पिटकुल) ने वर्ष 2006-07 में ट्रांसमिशन लाइन निर्माण के लिए मुंबई की एक कंपनी से सर्वे कराया गया। इसमें 152.8 किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइन का प्रस्ताव बनाया गया। सर्वे के लिए कंपनी को 57 लाख रुपये का भुगतान किया गया। लाइन निर्माण का टेंडर कोबरा कंपनी को मिला। उक्त कंपनी ने पुराना सर्वे नहीं माना और अपने स्तर से सर्वे कराया। इसमें लाइन की लंबाई 190 किमी हो गई और 25 किमी लंबी लाइन उत्तर प्रदेश की सीमा से होकर गुजरनी थी।

   जबकि, केंद्रीय और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के निर्देश थे कि लाइन उत्तराखंड की सीमा में ही बनाई जाए। लेकिन, पिटकुल प्रबंधन ने इसे दरकिनार कर अक्टूबर, 2014 में कंपनी को काम शुरू करने के लिए 53 लाख का भुगतान भी कर दिया। जबकि, आज तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। वर्तमान में लाइन निर्माण की अनुमानित लागत करीब 530 करोड़

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