November 19, 2018

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम आर्थिक सर्वेक्षण 2018 में किए गए विकास अनुमानों को किया खारिज

नई दिल्ली। आर्थिक सर्वेक्षण 2018 में किए गए विकास अनुमानों को खारिज करते हुए पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ने बताया कि इसमें विकास के दावों को लेकर कम साक्ष्य पेश किए गए और उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2018 की वृद्धि दर 6 से 6.5 फीसद के बीच होने की संभावना है।

उन्होंने सर्वे को एक ऐसा दस्तावेज बताया जो कि सरकार के भीतर आंतरिक विरोधाभासों के साथ पेश किया गया। चिदंबरम ने बताया कि इस दस्तावेज के मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था के भविष्य में कई ‘अगर’ संलग्न हैं।

क्या बोले चिदंबरम: चिदंबरम ने अपने बयान में कहा, “हालांकि आर्थिक सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान विकास दर 6.75 फीसद (दूसरी छमाही में 7.5 प्रतिशत की विकास दर) रहेगी, इस दावे को लेकर पर्याप्त साक्ष्य (तर्क) नहीं दिए गए हैं। पहली छमाही में विकास दर 6 फीसद थी और साल के अंत तक इसके 6 से 6.5 फीसद तक होने की संभावना है।

अर्थव्यवस्था के भविष्य में कई ‘अगर’ शामिल हैं। अधूरे कामों की सूची तैयार करने के बाद यह सर्वे विफलताओं के संबंध में तैयार किया गया मालूम होता है। इसके पीछे वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के ग्रोथ मोमेंटम को बरकरार रखने और तेल की कीमतों के मौजूदा स्तर पर जारी न रहने का हवाला दिया गया है। ऐसे में अगर इस दृष्टिकोण को अंधकारमय नहीं कहा जा सकता है तो इसे अनिश्चित कहा जा सकता है।”

गौरतलब है कि 29 जनवरी को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में आर्थिक सर्वे 2018 पेश किया था। 1 जनवरी 2018 को वो अपना चौथा पूर्णकालिक बजट पेश करेंगे।

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