November 19, 2018

प्रगति के पथ पर उत्त्तखण्ड
देहरादून। उत्तराखंड जैसे छोटे से राज्य में नौकरी के साधन बेशक सीमित हो सकते हैं, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों से लकदक हमारे राज्य में स्वरोजगार की असीम संभावनाएं छिपी हैं। बीते वर्ष में गरीबी उन्मूलन व स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाले राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), डेयरी उद्यमिता विकास जैसी तमाम योजनाओं ने गति पकड़ी और इस साल वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक इनके मंजिल तक पहुंचने की उम्मीद है।

ग्रामीणों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के माध्यम से पिछले वर्ष तक 26 हजार 698 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। हालांकि कुल लक्ष्य का यह 64 फीसद ही था, लिहाजा उम्मीद है कि नए साल पर प्रशिक्षण का लक्ष्य 100 फीसद प्राप्त कर लिया जाएगा। इस प्रशिक्षण से गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करने वाले लोगों के लिए भी अलग से प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की गत वर्ष की आखिरी बैठक में बताया गया इसके तहत कुल 1427 बीपीएल लोगों को प्रशिक्षण दिया जाना है। इस साल ये सभी प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर लेंगे और इससे कहीं न कहीं इन्हें गरीबी रेखा से ऊपर उठने का अवसर मिल पाएगा।

फसल बीमा से किसानों को मिलेगा बल

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खरीफ की फसल के लिए राज्य में 1.02 लाख किसानों को बीमा का लाभ दिया गया। जबकि मौसम आधारित फसल बीमा में 35 हजार से अधिक किसानों को बीमा से आच्छादित किया गया। इसके साथ ही रबी की फसल के लिए भी साल के अंत तक बड़ी संख्या में किसानों को लाभ दिया गया। नए साल पर बीमा के दायरे में आने वाले किसानों की संख्या में दोगुनी बढ़ोतरी होने की उम्मीद की जा रही है। वर्ष 2017 के अंत में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि किसानों की आय बढ़ाने में फसल बीमा अहम भूमिका निभा सकती है और इसके लिए अधिक से अधिक किसानों को बीमा के दायरे में लाया जाना चाहिए। ताकि वह फसल क्षति का डर त्यागकर पूरी शक्ति से कृषि क्षेत्र में जुट सकें।

किसानों की आय दोगुनी करने की तरफ राज्य 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के अनुरूप उत्तराखंड राज्य भी वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके लिए कृषि की अनुषंगी गतिविधियों जैसे-डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन आदि के माध्यम से भी किसानों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस उम्मीद के अनुरूप बैंकों से इन तमाम गतिविधियों के लिए वित्तपोषण की व्यवस्था की जा रही है। नए साल पर यह तय हो जाएगा कि किसानों की आय दोगुनी करने में राज्य किस रफ्तार से बढ़ रहा है।

अब गति पकड़ेगी वार्षिक ऋण योजना 

राज्य के लोगों की आर्थिको गति देने के मकसद से शुरू की गई वार्षिक ऋण योजना में गत वर्ष बैंकों की प्रगति भले ही निराशाजनक रही हो, लेकिन इस वर्ष इसके गति पकडऩे की पूरी उम्मीद है। बैंकर्स समिति की पिछली बैठक में भी बैंकों ने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में अधिकतम लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा।

मुद्रा योजना में 1896 करोड़ का लक्ष्य 

गरीबी से उठकर सुदृढ़ आर्थिकी के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना बेहद कारगर साबित हो रही है। साथ ही इसके प्रति बैंकों का रुझान काफी सकारात्मक भी है। यही वजह है कि मुद्रा योजना में पिछले साल 1896.22 करोड़ रुपये ऋण देने का जो लक्ष्य रखा था, उसमें साल के अंत तक 800 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरित किए जा चुके थे, जबकि इस साल यह लक्ष्य 100 फीसद होने की पूरी उम्मीद की जा रही है।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन के बढ़ते कदम 

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत स्वरोजगार की आस लगाए बैठे युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला उद्योग केंद्र (डीआइसी), खादी एवं ग्रामोद्योग केंद्र (केवीआइसी) व खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (केवीआइबी) को 975 इकाइयों को ऋण आवंटन के लक्ष्य के सापेक्ष 3038 आवेदन प्राप्त हो गए। यही कारण रहा कि राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की पिछली बैठक में 975 के लक्ष्य को बढ़ाने का आग्रह किया गया और समिति ने भी बात को समझते हुए इस लक्ष्य को 2438 करने की स्वीकृति प्रदान कर दी। लिहाजा, 19.33 करोड़ रुपये ऋण वितरण का जो लक्ष्य था, वह भी बढ़कर 48.35 करोड़ कर दिया गया।

स्टैंड अप इंडिया सिखा रहा सिर उठाकर जीना 

इस योजना के तहत हर बैंक शाखा को कम से कम एक महिला और अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग के व्यक्तिको स्वयं उद्यम स्थापित करने के लिए न्यूनतम 10 लाख व अधिकतम एक करोड़ रुपये ऋण देने का प्रावधान किया गया है। गत वर्ष योजना में कुल 253 आवेदन ही स्वीकृत किए जा सके और 58.32 करोड़ रुपया का ही ऋण दिया जा सका। इस धीमी रफ्तार पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह नाराजगी जाहिर कर चुके हैं और उन्होंने बैंकों को निर्देश भी दिए कि योजना में अधिक से अधिक पात्र लोगों को लाभ देना सुनिश्चित किया जाए। आशा है कि नए साल पर जब बैंकर्स समिति की बैठक होगी तो आंकड़े पहले के मुकाबले और बेहतर हो पाएंगे।